आप प्रेरित होना चाहते है या प्रभावित


आप सोच रहे होंगे ये प्रेरित और प्रभावित क्या है ? शायद ही आपने कभी इन शब्दों पर ध्यान दिया हो लेकिन में आज आपको बताने वाला हूँ , की प्रेरित क्या होता है और प्रभावित क्या होता है ? अक्सर ऐसा तब होता है जब हम अपने से ज्यादा सफल इंसान से या तो बात कर रहे हो या फिर उसके बारे में सुन रहे हो  या फिर उसके बारे में कुछ पड़ रहे हो या फिर उसी की लिखी हुई कोई क़िताब पड़ रहे हो ! तो जब भी हम अपने से ज्यादा सफल इंसान के संपर्क में आते है तब सिर्फ दो ही चीजे होती है या हम प्रेरित हो रहे होते है या फिर प्रभावित हो रहे होते है  अपने से ज्यादा सफल इंसान से प्रेरित होना अलग बात है , और प्रभावित होना बिलकुल अलग बात है ! जरूरी नहीं जो इंसान प्रभावित हुआ है वो प्रेरित भी हुआ हो और जो प्रेरित हुआ है वो प्रभावित होना ही नहीं चाहता हो ! अगर हम  प्रेरित और प्रभावित को ठीक से समझ लेते है तो हमें ये समझने में आसानी होगी की हमें प्रेरित होना चाहिए या फिर प्रभावित ! तो हम यहाँ ये समझ लेते है की आखिर ये प्रेरित और प्रभावित होता क्या है ! ताकि हम जब भी किसी इंसान से बात करें , उसे सुने या देखे तब हमको पता हो की हमें प्रभावित होना है या प्रेरित होना है !



प्रभावित होना क्या होता है  ? 



प्रभावित होना दिल से होता है , ज्यादातर लोग प्रेरित ना होकर प्रभावित ही होते है  जब भी हम अपने से ज्यादा सफल इंसान से मिलेंगे बात करेंगे या उनके बारे में कुछ पड़ेंगे  तो उनसे प्रभावित हो जाएंगे उनसे मिलने के बाद उनके प्रति हमारे अन्दर भाव प्रकट हो जाएंगे , दिल खुश हो जायेगा , शरीर में ज्यादा ऊर्जा उत्पन्न हो जायेगी हमारे अंदर उनके प्रति आस्था का भाव आ जाएगा हमको उनके सारे काम अच्छे लगने लगेंगे हम  उनको फॉलो करने लगेंगे मतलब की हम भावनात्मक रूप से उन्हें अपने से ज्यादा उच्च मान लेंगे और अपने आप को बिल्कुल नीचे गिरा देंगे और खुद को नीचा मान कर हीन भावना का शिकार हो जाएंगे और हमारे अंदर उनके प्रति समर्पण का भाव पैदा हो जायेगा 
तो कभी भी किसी इंसान की  सफलता को देख कर अगर हम पूरी तरह से प्रभावित हो जाते है तो जरूरी नहीं की ये पूरी तरीके से सही ही हो , ये गलत भी हो सकता है हा किसी भी सफल इंसान से  प्रभावित होना अच्छी बात है हम उनसे प्रभावित होकर उनकी अच्छी अच्छी बाते सुन रहे है उनके अच्छे अच्छे गुण हमारे अंदर आ रहे है जो की  आगे हमारे काम आने वाले है जिससे की हम भी अपने जीवन में सफल होने वाले है लेकिन कभी कभी ऐसा भी होता है की हम जिस इंसान से प्रभावित हुए है उनके बारे में हमको सिर्फ उनकी अच्छी अच्छी बाते पता हो  लेकिन उनके कुछ गलत काम भी हो सकते है जिसके बारे में  हमको पता नहीं हो मान लो की हमने किसी इंसान को सुना या उनकी कोई वीडियो ही देखी या उनके कोई गुण गान सुन लिए और हम उनसे प्रभावित हो गए और कुछ समय बाद पता चला उस इंसान ने कोई गलत काम कर दिया है तो हम जितने प्रभावित थे उतनी ही तकलीफ अब हमको होगी क्योकि हमने बिना कुछ सोचे समझे उनसे भावुक हो कर प्रभावित हो गए ! और अब हमको उनके गलत कामो के बारे में पता चला है तो हम दुखी हो रहे है तो हमे कभी भी किसी इंसान से भावुक हो कर पूरी तरह समर्पित नहीं होना है ! कभी - कभी कोई इंसान किसी दूसरे सफल इंसान से प्रभावित हो कर ठीक वैसे ही काम करने लगता है जैसे उस इंसान ने किया है जिससे वो प्रभावित है और बाद में बुरी तरीके से नाकामियाब हो जाता है  क्योकि एक इंसान दूसरे की तरह ठीक बेसा काम नहीं कर सकता जैसा उसने किया है  ये प्रकृति रूप से भी सही नहीं है क्योकि प्रकृति के हिसाब से भी कोई इंसान दूसरे इंसान के सो फीसदी सही नहीं होता है ..! ये वही लोग होते है जो किसी सफल व्यक्ति से मिलते है उनसे प्रभावित होते है और फिर बाद में शिकायत करते है की जब तक में आपसे बात करता हूँ जब तक मैं आपके बारे में सुनता हूँ तब तक सब कुछ ठीक होता है मैं खुश होता हूँ लेकिन कुछ समय बाद वापस पहले जैसा हो जाता हूँ ..!





प्रेरित क्या होता है ?



प्रेरित " सच में ये कमाल का शब्द है हर इंसान अपने  जीवन में इसका प्रयोग जरूर करता है जाने या अनजाने ! प्रेरित होना दिल से नहीं बल्कि दिमाग से होता है जो इंसान हमेशा कुछ सीखने का इच्छुक होता है जिसका मन जिज्ञासु होता है जो हमेशा कुछ सीखता रहता है वो इंसान कभी भी किसी भी इंसान से आसानी से प्रभावित नहीं होता जब तक वो किसी इंसान को ठीक से जान ना ले ये वो इंसान होते है जो सिर्फ किसी सफल इंसान से नहीं बल्कि हर किसी चीज से सीखने की इच्छा रखते है ...!  जैसे : - चींटी को बार बार गिर कर फिर से चढ़ते देख कर प्रेरित  हो जाना " ...! ,  कुत्ते को देख कर सीख जाना की सतर्क कैसे रहते है ...! ,  हंस से एकाग्रता सीख जाना इस तरह किसी भी चीज को देख कर कुछ भी सीख लेना जरूरी नहीं किसी सफल इंसान से ही सब कुछ सीखा जाए किसी भी इंसान से सीखा जा सकता है , किसी भी जीव से सीखा जा सकता है किसी भी घटना से सीखा जा सकता है ! तो प्रेरित होने वाला इंसान कभी भी आसानी से प्रभावित नहीं होता वो प्रेरित होता है ! दूसरे के गुण अपने अंदर लेता है वो इंसान सिर्फ वही चीज पर एकाग्र रहता है जो उसके लिए सही हो  ! प्रेरित होने वाला इंसान अच्छे और बुरे में फर्क समझता है क्या सही है और क्या गलत है कितना सही है कितना गलत है सब देख लेता है उसके बाद जो सही है सिर्फ उसी चीज को ले कर वो फिर अपने हिसाब से अपने उपयोग में लेता है चाहे वो कितने भी सफल इंसान को देख रहा हो , या सुन रहा हो लेकिन फिर भी वो पूरा सतर्क रहता है ! क्योकि उसे पता है जरूरी नहीं की जो ये बोल रहा है वो सब कुछ  सही ही हो गलत भी हो सकता है , और अगर गलत ना भी हो तो  उसके लिए सही हो सकता है मेरे लिए तो गलत हो सकता है ! बही काम करके वो सफल हो गया हो , लेकिन मैं ना हो पाऊ इसलिए कभी भी किसी इंसान से पूरी तरह प्रभावित ना हो बल्कि प्रेरित हो प्रभावित होना सही भी हो सकता है और गलत भी हो सकता है या फिर किसी और के लिए सही हो लेकिन आपके लिए सही ना हो ! इसलिए प्रेरित सही है ये सही ही होना है और हमें कभी भी किसी के प्रभाव में आकर प्रभावित नहीं होना चाहिए बल्कि प्रेरित होना चाहिए उनके गुण अपने अंदर लेना चाहिए फिर अपने हिसाब से उनका इस्तेमाल करना है और विश्वास रखना है की हमने सही किया है तो सही ही होगा ...!


अब आप समझ गए होंगे की प्रभावित होना क्या होता है और प्रेरित होना क्या होता है प्रेरित हुआ इंसान सारे काम सोच समझ कर करता है किसी भी चीज से सीख कर फिर अपनी जरूरत , अपना समय और अपने हालातों को समझ कर निर्णय लेता है जिससे की गलती ना हो और अगर हो तो कम से कम गलतियां हो और उस गलती को सुधारने के लिए पहले से तैयार हो और प्रभावित हुआ इंसान देखता है और बिना सोचे समझे शुरू कर देता है फिर  बड़ी गलती कर देता है जिससे की उससे बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है लेकिन यहां पर समझने वाली बात ये भी है की प्रेरित होने वाला इंसान भी तभी प्रेरित हो सकता है जब उसका खुद का एक स्थान हो वो दुसरो को मानने से पहले खुद को कुछ मानता हो वो दुसरो को देखने से पहले या मिलने से पहले एक दूसरे की तुलना ना करता हो कभी भी किसी इंसान की किसी दूसरे इंसान से तुलना ना करता हो ऐसा इसलिए नहीं करना चाहिए क्योकि वो कभी भी सो फीसदी सही नहीं होता है हर इंसान अपने आप में सर्वश्रेष्ट होता है हो सकता है एक विद्यार्थी इतिहास और संस्कृत बोहोत अच्छे से जनता हो लेकिन उसे विज्ञान में कुछ नहीं आता हो ! और हो सकता है एक विद्यार्थी विज्ञान बोहोत अच्छे से जनता हो लेकिन उसे बाकी का कुछ ना आता हो ! तो किसी की भी किसी दूसरे से तुलना करना सही नहीं है !
क्योंकि विज्ञान वाले विद्यार्थी को विज्ञान ही दिखेगी वो इतिहास में से भी विज्ञान ही निकालेगा , और इतिहास वाला विद्यार्थी विज्ञान में से भी इतिहास निकालेगा ! लेकिन अगर वो प्रभावित हुआ तो वो कुछ समय की खुशी के लिए छोड़ कर उस काम को करने लगेगा जिससे वो प्रभावित है फिर हार कर बापस आएगा ! लेकिन अगर वो प्रेरित हुआ तो जो भी उसे सही लगता है वो उसे कही से भी निकाल लेगा ...!


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